युवा सशक्तिकरण महाअभियान, युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ाकर राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भूमिका को सुनिश्चित करना है।

आजाद समाज पार्टी (काशीराम)
सशक्तिकरण महाअभियान के अंतर्गत युवाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक रूप से सशक्त कर आत्मविश्वासी बनाकर उनको उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर करना है।
- सामाजिक सशक्तिकरण
- आर्थिक सशक्तिकरण
- राजनैतिक सशक्तिकरण
- शैक्षिक सशक्तिकरण
- सांस्कृतिक सशक्तिकरण
हमारे उद्देश्य
सशक्तिकरण महाअभियान के अंतर्गत युवाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक रूप से सशक्त कर आत्मविश्वासी बनाकर उनको उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर करना है।
सामाजिक सशक्तिकरण
हमारा लक्ष्य युवाओं में एक ऐसी भावना का जागरण करना है जिसके माध्यम से सभी में समता, समानता, भ्रातृत्व, बंधुत्व, लोकतांत्रिक, संवैधानिक और न्यायिक चरित्र का निर्माण हो सके और जिसके फलस्वरुप सभी के अंदर एक दूसरे के प्रति सकारात्मक संवेदनाएं उत्पन्न हो सकें ताकि भविष्य में भारत के नागरिक एक दूसरे के प्रति बगैर किसी दुर्भावना के अर्थात जाति,धर्म,वर्ग, क्षेत्र, भाषा, सम्प्रदाय आदि बुराइयों को ताक पर रखकर एक दूसरे का सहयोग कर सकें और सभी संविधान को ही सर्वोपरि मानें।
सांस्कृतिक सशक्तिकरण
हमारा उद्देश्य देश में बुद्ध,संत कबीर ,संत रविदास,गुरु नानक और सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, सम्राट हर्षवर्धन, सम्राट कनिष्क व ज्योतिराव फुले,ई. रामास्वामी नायकर पेरियार,बिरसा मुंडा, बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर,रामस्वरूप वर्मा, मान्यवर कांशीराम साहब आदि की विचारधारा के अनुरूप संस्कृति की स्थापना करना है क्योंकि देश के समस्त युवाओं का कल्याण इसी विचारधारा में है।
आर्थिक सशक्तिकरण
हमारा उद्देश्य भारत के समस्त युवाओं को उनके भविष्य के प्रति जागरूक करना है उन्हें सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार मुहैया कराने हेतु उनका मानसिक विकास करना है। डॉ. अम्बेडकर निजीकरण की नीति को युवाओं के लिए घातक बताते हैं और सार्वजनिक क्षेत्र का ही निर्माण देश में चाहते हैं ताकि इसके माध्यम से देश में सरकार के माध्यम से रोजगार पैदा किया जा सके ताकि युवाओं को इन क्षेत्रों में रोजगार बगैर किसी जातिवाद,धर्म, क्षेत्र,भाषा, सम्प्रदाय के आसानी से उपलब्ध कराया जा सके। यह कार्य सरकार के माध्यम से आसानी से हो सकता है क्योंकि निजी क्षेत्र के बारे में ऐसी राय है कि यह देश के नागरिकों का केवल खून चूसना चाहते हैं लेकिन उन्हें न्यायिक पारिश्रमिक नहीं देना चाहते। जबकि इनके तथाकथित मालिकों/सीओ आदि का वेतन करोड़ों रुपये होता है। अतः युवाओं के पक्ष में हम ऐसी आर्थिक असमानता को ध्वस्त कर आर्थिक समानता लाना चाहते हैं।
शैक्षिक सशक्तिकरण
राष्ट्रपिता ज्योति राव फुले ने कहा था कि "शिक्षा बिना मति गई, मति बिना गति गई, गति बिना वित्त गया और वित्त के अभाव में सभी पतित हुए| इतना सारा अनर्थ केवल शिक्षित न होने के कारण हुआ" अतः हमारा उद्देश्य देश के समस्त युवाओं को शिक्षित करना है उनमें ऐसी शिक्षा प्रणाली का विकास करना है ताकि वह विवेकवान बन सके। हमारा उद्देश्य देश में ऐसी शिक्षा प्रणाली का विकास करना है कि देश के प्रत्येक आर्थिक स्थिति वाले बच्चों की शिक्षा एक साथ एक ही स्कूल में संपन्न हो, एक पाठ्यक्रम हो,किसी भी बच्चे के प्रति विभेद की व्यवस्था न हो और शिक्षा पूर्णतया फ्री हो। ऐसी व्यवस्था में शिक्षित बच्चे एक अच्छे विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे और देश में वे संविधान वाद का निर्माण कर सकेंगे जिसके कारण देश में हर प्रकार के जातिवाद धर्मवाद क्षेत्रवाद संप्रदायवाद भाषावाद का विनाश हो जाएगा व समता समानता स्वतंत्रता भ्रातृत्व बंधुत्व की प्रबल विचारधारा से लैस होकर वास्तव में एक राष्ट्र का निर्माण हो सकेगा।
राजनैतिक सशक्तिकरण
हमारा लक्ष्य देश के युवाओं में ऐसी राजनीतिक समझ विकसित करना है जिसके माध्यम से वे देश में अपनी हितैषी सरकार की स्थापना कर सकें वह एक ऐसी न्यायिक चरित्र वाली सरकार की स्थापना कर सकें जो देश के नागरिकों के कष्टों पर द्रवित हो उठे,वह तानाशाह न हो, वह पूंजीपतियों की गुलाम न हो| राजनीति से ही देश की समस्त नीतियों का निर्माण होता है इसलिए इसके प्रति युवाओं के मन में नकारात्मक भावना न हो बल्कि पूर्ण रूप से सकारात्मक भाव हो| जब अच्छे समझदार योग्य युवा राजनीति में जाएंगे तो वह अपने हितों की सरकार बन सकेंगे।
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